उच्च शैक्षिक स्तर के साथ-साथ सदगुणों का विकास भी हो यह बात वातावरण, क्रियाकलाप तथा शिक्षण व्यवस्था पर बहुत कुछ निर्भर करती है परन्तु पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों का भी अपना विशेष महत्व है इस बात को ध्यान में रखकर एन. सी. ई. आर. टी. व विद्याभारती का पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकें तथा अतिरिक्त विषयों का अपना पाठ्यक्रम एवं पाठ्य पुस्तकों की रचना की गई है | छोटी कक्षाओं में सीखने की जिज्ञासा क्रियाशीलता एवं अभ्यास के माध्यम से शिक्षण – पद्धति भी विकसित की गई है | जिसका केंद्र “बालक” है | पंचपदी शिक्षण पद्धति के माध्यम से बालक के पंचमुखी – शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक, एवं आध्यात्मिक तथा सामाजिक विकास की समुचित व्यवस्था करने का प्रयास किया जाता है | जिसके साधन हैं – पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकें, शिक्षण पद्धति, क्रियाकलाप कार्यक्रम विविध व्यवस्थाऐं तथा आचार्य – अभिभावक गोष्ठियां |

 

शिक्षा का माध्यम
शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों है| द्वितीय कक्षा से संस्कृत का शिक्षण भी प्रारम्भ होता है| अंग्रेजी एवं संस्कृत में वार्तालाप का अभ्यास भी कराया जाता है | अन्य भारतीय भाषाओ के प्रति रुचि एवं सम्मान का भाव बनें इसलिए विभिन्न भाषाओं के गीतों का अभ्यास कराया जाता है |